#काव्योत्सव के लिए
हास्य कविता ?
*हाय !!मेरा सुंदर सपना*
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खुशखबरी है! भाई खुशखबरी !
कबसे था जिसका इंतजार
आने वाला है वह मेहरबान
जिसके सपने देखे हैं
मैंने जाने कितने साल ....
आखिर आने वाला है ।
वह प्यारा मेहमान।
आज की है वह शुभ घड़ी
आने वाला है वह मेहरबान
सुबह से अखियां दरवाजे पर
टिकी हुई है।
हर आहट... पर लगे
जैसे वह है आ गया।
जाने कितने सालों की
सेवा का मेवा मांगा है ।
पति.,,, महोदय से..
और मांगा है भगवान से
आखिर दुआ कबूल हो गई
वर इच्छित मिल गया।
पर यह क्या हुआ!!!!
सुबह से दोपहर हो गई
और हो गई... शाम
पतिदेव न लेकर आए
वह प्यारा मेहमान।
पानी की एक बूंद
न गई मुंह के अंदर ....
और न अन्न का एक दाना
इंतज़ार में एक एक पल
सदियों जैसे बीता...
आखिर पतिदेव को आते देखा
मन झूमा बन भंवरा आवारा।
हाय राम!!!!!ये क्या❓
वे थे खाली हाथ...........
देख मैं हो गई बड़ी उदास
फिर सोचा शायद
कहीं छुपाया होगा
देने मुझे सरप्राइज़.....
दौड़ के जाकर पीछे देखा
और आगे भी देखा...
देखा दाएं-बाएं पर कोई
कहीं पर न था।
पतिदेव ने सिर मटका कर
इनकार की मोहर लगाई ।
मेरे दिल के टूटने की आवाज यह आई ।
हाय !!मेरा सुंदर सपना
हाय मेरा सुंदर सपना टूट गया!!
कितने सपने देखे थे।
कि वह.... घर आएगा.....
सारी कॉलोनी में
धाक मेरी जम जाएगी
मेरी भी गिनती अमीरों में हो जाएगी
साथ उसके जब जब
मैं गार्डन घूमने जाऊंगी।
हर कोई देख जलेगा
और मैं शान से इतराऊंगी
मिसेज वर्मा तो देख मुझे
साथ उसके....
जल भुनकर रह जाएगी
कई दिनों तक वह मुझे मुंह न दिखाएगी।
अब तक....
उसने मुझे नीचा दिखाया
अब थी मेरी बारी....
पर यह क्या हाय राम !
मेरा सपना टूट गया!!
विदेशी नस्ल का डागी
घर आने के पहले ही भाग गया।
मेरा सुंदर सपना टूट गया
हाय हाय हाय !!!
अब मैं जी कर क्या करूं!
*अर्चना राय भेड़ाघाट जबलपुर मध्य प्रदेश* ???