#kavyotsav -2
एक को ठोकर लगने पर
दुसरे को तकलीफ़ होगी;
इसी भ्रम में
संभल कर चलना आ गया
चाहे छोटे-छोटे कंकड़ों
से होते रहे
पांव घायल
कबूतर कंकड़ चुगते हैं
तुमने कहा था
मैं कंकड़ों को चुनती रही
गेहूं की बालियों से
एक दिन
सारे खेत कंकड़ में
बदल जायेंगे
और पत्थर उड़ने लगेंगे
कबूतर की तरह
सालों पहले अस्पताल में
दिये गए एनेस्थीसिया
के असर में
क्या अब भी हूं?
तुम बताओ ना
क्या मुझे फिर
होश नहीं आया था?
मेरा स्थाई पता
क्या है इन दिनों!
#लता