तेरे दीदार को
आया तेरे द्वार पर
तेरी इक झलक को
तरसा मेरे यार में
खुदा भी मिलता है
जब होता सजदा मेरे यार का|
चल आए हैं देख
न जाने कहाँ हम
पसंद करते हैं
रहना तेरी छाँव में
खिल जातें हैं फूल भी
जब होता सजदा मेरे यार का|
आँखों में तेरी देख
बस यूँ जी रहा मैं
खो जाता में यूँ ही
जब ख्याल आता मेरे यार का
जग जाता मेरा वजूद भी
जब होता सजदा मेरे यार का|
कर लेता हूँ सदा
बातें तेरी मेरे यार मैं
मुस्करा देता हूँ थोडा
जब आता तेरा नाम हैं
थम जाता वक्त भी
जब होता सजदा मेरे यार का|
सोचुँ खुदा फूल बरसाएगा
जब होगा मिलन हमारा
क्या दूँगा तुम्हे तब
ये सोच दिन बिताता हूँ
कायनात भी सँवर जाएगी
जब होगा सजदा मेरे यार का|
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