#kavyotsav_2
तेरी इन यादों को क्या करूँ
बैठे-बैठे जाने कहाँ खो जाता हूं
उन चांदनी रातों में
उन महकती फूलो में
तेरे ही होने का अहसास रहता है
उन ओस की बूंदो सा मेरे मन को भीगा देती है
बताओं ना
तेरी इन यादो का क्या करूँ
सोने पर स्वप्न बनकर आ जाती हों
सूरज की किरण बनकर
सोते हुए कभी जागती हों
पढ़ते हुए किताबो के पन्नो में
बिना बताए दस्तक दे जाती हो
बताओ ना
तेरी इन यादों का क्या करूँ
मेरी सुबह में मेरी शाम में
बस तू ही तू नजर आती है
तेरी यादो में अव शायद मैं हु की नही
न चाहते हुए फिर जाने क्यों
तेरी याद मुझकों आ जाती है
अब आके जरा बता भी दो
तेरी इन यादो का क्या करूँ