#काव्योत्सव #भावनात्मक कविता
नया नया कवि हूं मैं
कविता रच रहा हूं
आजकल महफिलों में, मै
शोर सा मच रहा हूं
अब अलंकारों से है मित्रता
और अल्फाजों से मोहब्बत
सजाता हूं नगमे और
खुद भी सज रहा हूं
नया नया कवि हूं मैं
कविता रच रहा हूं
गीत हो नज़्म हो
या फ़िर शेरो शायरी
किरदार है नया मेरा
फिर भी जंच रहा हूं
नया नया कवि हूं मैं
कविता रच रहा हूं
मन रहता है प्रसन्न
और चित्त रहता है शांत
उलझा रहता था जंहा, उन
तनावों से बच रहा हूं
नया नया कवि हूं मैं
कविता रच रहा हूं