ना रुकूँगी मैं,न झुकूँगी मैं,
ना तुटूँगी मैं, न हारूँगी मैं,
आत्मसन्मान के लिए लडूंगी मैं।
समन्दर की गहराई हो या हो परबत की चोटी,
आसमानकी ऊंचाई भी है मेरे आगे छोटी,
ऐसी कोई जगह नही जहाँ मैं न पहुँची,
ओफ़िस में अपना हुनर दिखाती,
चाहे घरमे पकाती रोटी,
रणमैदान में उतरु तो समशिर से दुश्मनकी करदु बोटी बोटी।
कल्पना कहो के लक्ष्मीबाई,सुनीता या साइना,
लता आशा या मेरीकॉम,गीता या बबिता,
सुधा कहो या विद्या,हर क्षेत्र में है हमारा डंका।
दम है दमदार है जोश शानदार है,
तेज़ है तर्रार है,ये दो धारी तलवार है,
पीछे कभी हटी नही,मुश्किलो से कभी डरी नही,
आगे ही बढ़ती जायेगी सदियो से ये रुकी नही।
देवी भी है,नारी भी है,रति भी है,भक्ति भी है,
रूप है अनेक इसके हर रूप शक्तिस्वरूप है।
करुणा की मूरत है हम,प्यार की है भरती,
दुर्बल नही,सबल है हम, मनसे प्रबल है हम।
हमे तोड़ दे ऐसी किसी में ताकत नही,
खुद से हारना भी मुझे स्वीकार नही।
हम अगर ठान ले तो झुका दे पूरी दुनिया,
हम है इण्डिया की वुमनिया,हम है इण्डिया की वुमनिया।
-जिगर बुंदेला