kavyotsav-2
एक सुकून तो मिलेगा
ये सुकून न जाने
किस रात में मिलेगा
ये ख्वाहिश और
सब्र रखती हूं
जब भी मिलेगा
दिल खोलकर मिलेगा
न जाने इस बैचेनी का
कितना वक्त बचा है
जाने को जैसे इसका
मन ही नहीं करता है
पर खुश हो लेती हूं
ये सोच कर
हुआ अगर बुरा तो
अच्छा भी जरूर होगा
लगता है जैसे किस्मत में
मेरे ही सब लिखा है
जो भी तुम को मिलेगा
वो बाद मे मिलेगा
ये नींद न जाने क्यूं
गायब सी हो गई है
जैसे किसी ने इसको
मरोड़ सा दिया है
जिस्म तो बाकी है
पर दिल चटक रहा है
उम्मीद पर टिकी हूं
एक सुकून तो मिलेगा