**उल्लासों के दीप जले**
अम्मा तुम्हीं बताओ मुझको,
बापू क्यों लंगड़ाते हैं ।
कारण जब पूँछू तो उनके,
आँसू क्यों भर आते हैं ।।
बम,अनार, कन्डील, मिठाई,
बापू अभी नहीं लाए ।
अपने घर में अँधियारा क्यों ,
चहुँ दिश उजियारा छाए ।।
नन्हें बबलू की बातों का,
अम्मा क्या उत्तर देती ।
गले लगाकर बबलू को वह,
सिसकी भरकर रो लेती ।।
कहतीं,-‘बेटे,क्या बतलाऊँ,
बापू की है लाचारी ।
कटी टाँग जब दुर्घटना में ,
तब से है यह बेकारी ।।
बापू थे सेना में भर्ती,
जब दुश्मन से जंग हुई ।
उनकी गोली से ना जाने,
कितनी सांसें बन्द हुई ।।
थर्रायी दुश्मन की सेना,
बापू के हथियारों से ।
तभी टाँग घायल हुई उनकी,
बम के घातक वारों से ।।
गिरते-गिरते भी उन्होंने,
दर्जन भर दुश्मन मारे ।
नहीं सम्भल पाए जब बापू,
गिरे धरा पर बेचारे ।।
सभी डाक्टरों ने मिल करके,
सारी कोशिश कर डाली ।
लेकिन टाँग बचा न पाए,
रुकी चाल फिर मतवाली ।।
नहीं आएंगे बम, राकेट कुछ,
उजियारा भी ना होगा ।
तुमको ही दीपक सा बनकर,
जग-रोशन करना होगा ।।
माँ को रोते देख कहा,
बबलू ने, मत रो अम्मा ।
नहीं चाहिए मुझे मिठाई,
सूखी रोटी दो अम्मा ।।
खील-मिठाई खाऊँगा जब,
खूब बड़ा हो जाऊँगा ।
भाग जाएगा अन्धकार सब,
अनगिन दीप जलाऊंगा ।।
बापू से बोला बबलू यों,
तुम भी अब मत रो बापू ।
मैं भी एक बनूँगा सैनिक ,
तुम चिन्तित मत हो बापू ।।
चुन-चुन करके हर दुश्मन को,
चिर निद्रा सुलवाऊँगा ।
भारत माँ के हर संकट को,
क्षण में दूर भगाऊँगा ।।
बबलू की बातें सुन सबके,
हृदयन्तर में फूल खिले ।
यादगार बन गयी दिवाली,
उल्लासों के दीप जले ।।
- डॉ०देशबन्धु शाहजहाँपुरी
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