बैठी फूल की सेजिया पर
मैं करती तेरा इंतजार सनम।
तू हरजाई या सौदाई
हूँ तेरे लिए बेकरार सनम।।
सौ बातें हैं सौ सपने हैं
जाने कब से ये पलते हैं।
क्या रूप तेरा क्या अक्श तेरा
बस तेरे लिए ए सजदे हैं।।
इंतजार मेरा कितना लम्बा
दशकों शदियों की प्यासी हूँ।
अब तो आ जा ओ प्राणप्रिये
मैं तेरे ही चरणों की दासी हूँ।।