प्यार का अहसास
मेरे दिल में यूँ समा गया।
मैं तड़पती रही
कोई मुझे यूँ तड़पा गया।।
सोचों में जो शामिल है
तू वही बलम हरजाई है।
मैं बिरह की मारी सुलग रही
तुने कैसी अगन लगाई है।।
तू आया था सपना बन कर
जो गया तो क्यूँ नासूर है तू।
तू रह रह कर चुभता तन मन में
फिर भी जिन्दगी का फितूर है तू।।