kavyotsav-2
नारी जीवन झूले की तरह इस पार कभी उस पार कभी।
होंठो पे मधुर मुस्कान कभी और आंखो में आँसूअन धार कभी।
दिए की तरह खुद जलती है ,दुनियां को उजाला देती है।
कभी मीरा बनी, कभी सीता बनी ,कभी रानी बनी थी झांसी की।
कभी फूल चढ़ाये भक्ति के ,कभी हाथों में तलवार कड़ी ।
कितना सुख देती है जग को माँ,बेटी ,बहन ,पत्नी बनकर ।
है कितना कठिन जीवन इनका समझा न इसे संसार कभी।
नारी जीवन झूले की तरह------।