गज़ल
आंखे खुली,दिल तुट गया,
अपना कोई वादे से रुठ गया.
नदियाँ समंदर के प्यार मैं तडपी,
रुह इतना रोई दिल पीगल गया.
कर बैठा मन कितने सवाल,
जब मैने प्यार करने की ठानी .
लब्ज़ के अल्फ़ाज़ बिखर गए,
प्यार मैं कोई अपना लुट गया.
अजीब थी वो रात प्यार का इज़हार हुआ,
तुम आये थे हवा की तरह इशारा देके चले गए.
लब्ज़ की जिंदगी खाली रह गई,
तुम अंजान गली मैं छोड गए थे।
शैमी ओझा लब्ज़