लड़की एक कठपुतली ।
नाचती रहती हरदम ,
पिता पति पुत्त के इशारों पर।
जीवन उनका एक समान ,
रोता दिल, पर अॉसूं ना आते काम।
जीवन एक संगराम ,
जुड़ा ससुराल और मायके का नाम।
सपने उनके तमाम बन जाते,
इनके निशान।
मायके की शान,
ससुराल का मान।
फिर भी उनका क्या स्थान ,
सहती हरदम अपमान।