बीरबल अपने हाजिरजवाबी और अक्लमंदी के लिए जाने जाते थे तभी तो शहंशाह अकबर ने उन्हें अपने नव-रत्नों में शामिल किया था.
यह बात उस समय के सभी राजाओं तक पहुंच गयी और वे लोग बीरबल को अपने यहाँ आने का निमंत्रण देते थे. एक बार ऐसे ही उन्हें निमंत्रण आया, वहां पहुचने के बाद उनको पूरे सम्मान के साथ राज-प्रसाद में ले जाया गया. जब वे राज-दरबार में गए तो वहां नौ लोग राजा की वेश-भूषा के साथ बैठे थे,
सभी एक जैसे वस्त्र और आभूषण वाले थे. फिर भी बीरबल असली राजा को पहचान गए. क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बीरबल ने क्या किया?
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