*" ठगते नहीं पर ठगवाते है "*
खुद के गांव या शहर में ठगे गए ? नहीं या बहोत कम | तो वैसा रहेना चाहिए कहे ही क्यु की कहां के हैं ! पर लग पडे हमारे वहां ऐसा वैसा तो ठगे ही राह भी ना मालुम हो फिर भी क्यु कहे ! पर चुप रहे तो काफी सारी परेशानी दुर हो | रास्ता नहीं पता पर ऐसी कोई जगह आए तो कहे सकते ये कहां लीया ? दुसरा भी रास्ता है | ऐसा कभी नहीं होता कि एक जगह जाने को दुसरा रास्ता ना हो | पर घूमने निकलते ही न जाने क्या बन बैठे तो फिर तो ठगे ही |...ॐD