मैं तो सुख-दुख में बीत गया
पर ज्योति योंही रहती है,
लोग आते जाते हैं
आकाश योंही रहता है।
राह से लोग गुजरते हैं
राह वहीं रह जाती है,
संघर्ष नये बनते हैं
जीजिविषा सदा चलती है।
प्यार के कथानक बदलते हैं
प्यार शाश्वत रह जाता है,
यादों के संदर्भ रूक जाते हैं
जीवन आगे बढ़ जाता है।
प्राण हवा हो जाते हैं
ज्ञान खड़ा रह जाता है,
ये काया बदल जाती है
दिन-रात चलते रहते हैं।
*महेश रौतेला