*" जीद या जल्दबाजी कभी गलती भी करवा सकती है "*
तरुणकी नौकरी लगी है गांव में आने जाने में दिक्कत है इसलिए वहां ही रेहाना पडता है | घर से दुर है इसलिए खर्च बढा पर शांति की नौकरी कुछ खास काम न था बस कभी ही कोई फोर्म भरने होते थे | पर गांव में मजा न आता इसलिए घर के नजदीक नौकरी के लिए दरख्वास्त की जाती | बहोत घक्के, बहोत बहेस और कीतने ही अफसर से केहकर घर के पास नौकरी लगवाई जाती है पर होता ये है कि काम बहोत ज्यादा रहता है रोज ही कोई न कोई आता और फोर्म भरना पड़ता | इसलिए तरुण को गांव की नौकरी की याद आया करती और अफसोस कीया करता कि अगर थोडा दिमाग दौडाया होता तो आज ये सब भुगतना न पड़ता | कीतनो से लड़ाई कि बहेस के बाद नौकरी मीली फिर भी सुकुन नहीं | अगर गांव में रहा होता तो छुट्टी पर जो घूम फीर सकता उतना तो होता पर यहां तो इतनी थकावट महसूस करता हूं कि घर से बाहर जाने का मन न करता | ऐसा लगे कि थकान मीटे बस उतना काफी है | बहोत बड़ी गलती की जो बीना सोचे ही सब कीया |...ॐD