एक था "मास्टर"!
हर रोज़ जब भी स्कूल के बच्चों का "खेल" का पीरियड होता तो कुछ चार नौजवान 'लाश' की तरह बेहोशी की हालत में पड़े मिलते! असल में ये चार लोग किसान थे, पर अकाल पड़ने और ज़मीनदारो से परेशान होकर शहर में रोज़गारी की तलाश में आए थे। शहर में तो आ गए, पर रोज़गारी ना मिलने के कारण उन लोगों ने शराब पीना शुरू कर दिया था! ये लोग शराब की थैलियाँ लेकर आते और पास में स्थित स्कूल के ग्राउन्ड में शराब पीकर अगले दिन के सांज तक 'मुरदो' की तरह पड़े रहते।
एक दिन स्कूल के विद्यार्थियों ने मास्टरजी से शिकायत की इस बारे में, मास्टरजी चौंक गए और पुलिस से 'कम्पलेन' करने तक का सोचा!...पर उन्होंने गहन चिंतन किया और अगले ही दिन कुछ विद्यार्थियों के साथ, 'फूटबोल' लेकर ग्राउन्ड में पहुंच गए, उसी समय मास्टरजी ने उन चार नौजवान को खेलने के लिए प्रोत्साहित किया और वे लोग मान भी गए!
मास्टरजी हर रोज़ फूटबोल लेकर आते और उन चार नौजवानों को खेलना सिखाते।
आज एक महीना बीत गया है और उन्होंने आज तक शराब की एक बूंद तक नहीं पी है। ये लोग आज इतना अच्छा फूटबोल खेलते हैं कि "स्टेट लेवल" टीम में भी अपनी जगह बना दी है!
तो ये थी कहानी, जिसमे मास्टरजी ने शराब के नशे में खोए हुए कुछ नौजवानों को सही राह दिखलाई!
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