# moral stories
“ बेईमान “
शिवानी बाजार में सब्जी लेने गई तो उसने सब्जी वाले से कहा –“ भैया 5 किलो आलू तो देना ।“
सब्जी वाले ने तुरंत ही तराजू को आलू के ढेर में सटा कर आलू भर कर फटाफट तौलते हुए “- लाइए बहन जी ₹100 निकालिए ।“
शिवानी को आलू कम लगे । उसने कहा-“ यह तो बहुत कम लग रहे हैं ,फिर से तौलो ।“
सब्जी वाला अकड़ते हुए –“ हमारे औंर भी ग्राहक है ,मैं उनको देखूँ या बार-बार आपको ही एक ही सामान तोल कर देता रहूं । मुझे रुपये दीजिए और अपना काम करने दीजिए ।“
तब तक औंर लोग भी उससे कम तौलने की शिकायत करने लगे । वहां भीड़ लग गई । शिवानी ने उससे तराजू दिखाने को कहा तो वह आनाकानी करने लगा । शिवानी ने लपक कर तराजू उठाकर पलट दिया तो सबने देखा नीचे चुंबक लगा हुआ था । यह देख कर वह बातें बनाने लगा कि “मेरा तराजू टूटा है इसलिए मैंने इसका बैलेंस बनाया है यह चुंबक नहीं है । "शिवानी ने तुरंत चुम्बक हटाकर आलू तौलने को कहा । जब दोबारा आलू तौला गया तो सिर्फ 4 किलो ही निकला । यह देख कर वहां सब लोग उसको बुरा भला कहने लगे । सब लोग उसकी सब्जी वापस करते हुए उससें अपने पैसे वापस मांगने लगे । यह देखकर वह घबरा गया और हाथ जोड़कर गिडगिडाने लगा –“ बहन जी मैं गरीब आदमी हूँ ,क्यों आप मेरी रोजी-रोटी पर लात मार रही हैं ?”
शिवानी बोली –“ यह मेरी वजह से नहीं याद तुम्हारी गलती है ।तुम ग्राहक से पैसा पूरा लेते हो तो पूरा सामान भी दो ।“ सब्जी वाले की आंखें शर्म से झुक गई ।