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मेरी आशिक़ी
ओह भोंदू जब तक तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में है ना, दुनिया की कोई ताक़त मुझे तुमसे छीन के नहीं ले जा सकती, यूँ सड्डू सा मुँह लेकर ना घूमा करो सड़कों पर। ये सोच कर एक और आशिक़ी ने जन्म लिया। जब उसका हाथ थाम के चलती हूँ ना तो किसी से डर नहीं लगता। जब वो हँसता है ना तो सारी दुनिया अपने आप मुस्कुराने लगती है। क्या सचमुच प्यार ऐसा ही होता है प्यार। ये सोचते हुए दीपा मन ही मन मुस्कुरा दी। उसे दीपक का साथ जो मिल गया था। पर जैसा कि लगभग सभी की जिंदगी में होता है। दोस्ती कब प्यार में बदल गयी पता ही नहीं चला। और धीरे धीरे हालात भी बदलते गए। एक दिन दीपक को पता चला कि उसकी दीपा की शादी होने वाली है। मन ही मन बहुत घबराहट हुई। अब उसे नींद भी नहीं आती थी रातों में, पर क्या करते वो। एक दूसरे के साथ रहना शायद दीपा के घरवालों को पसंद नहीं आया और जबरदस्ती उसकी शादी करा दी गयी। उस दिन से दीपक ने उसे ना परेशान किया और ना ही उसे अपने दिल का हाल बताया, बस दीपा की खुशियों की खातिर सबकी जिंदगी में रंग भरने की कोशिश करता है। सबसे छुपा कर , पर दीपा भी उससे बहुत प्यार करती है और उसे दुःख ना हो इसलिए अपनी आपबीती बता नहीं पाती है। और दोनों एक दूसरे के परिवार की खातिर एक दूसरे से दूर रहकर भी अपने फर्ज़ निभा रहे हैं।