?कोई भी इंसान व्यर्थ में ही जीवन नहीं जीता कुछ न कुछ करने को ही जीता है |
जैसे कि ->...ॐD
?परिवार के लिए कुछ करना
?कीसीके पास पैसे है तो भुखे को खाना खिलाना
?कीसी के पास काम है तो दुसरो को काम देना
?कीसीके पास ज्ञान है तो सब में बांटना आदी
?हर काम पैसों के लिए नहीं कीया जाता कभी कुछ काम दुसरो को आगे लाने, मदद करने, अच्छा सीखाने को यानी हमें जो कुछ भी आता है या हमारे पास ऐसा कुछ है तो वो हमें दुसरो को देना है जीस के पास नहीं जीसे जरुरत है उसे |
?अपनी अपनी शक्ति के हिसाब से सब को काम करना पडता है या करवाना होता है | जो काम नि:स्वार्थ भाव से हो और दुसरो की जरूरत पुरी करें वहीं कीया काम सार्थक तभी हमारी और दुसरो की प्रगति संभव है ( अगर कोई काम कीया जैसे कि शिफारिश कर पांचसो लोगों से अच्छा कहेलवा दीया पर क्या ऐसा हर बार कर सकते ? नहीं तो ऐसा काम करना चाहीए जीस में शिफारिश की जरूरत न पडे तब भी हमारा काम पसंद करे और उसके लिए काम के पीछे महेनत जरुरी है )...ॐD