❛झांक रहे सब सबके आँगन
अपने आँगन झाँके कौन ?
ढूँढ रहे दुनियाँ में खामी
अपने मन में झाँके कौन ?
सबके भीतर चोर छुपा है
उसको अब ललकारे कौन ?
दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते
खुद को आज सुधारे कौन ?
पर उपदेश कुशल बहुतेरे
खुद पर आज बिचारे कौन ?
हम सुधरें तो जग सुधरेगा
इस मुद्दे पर सब हैं मौन ?❜