आगाश
आगाश हो चुका है देखे अंजाम क्या होता है|
आवाज दे चूके है देखे सुनाई देती है या नहीं||
महोब्बत की राह में निकल तो पडे है |
न जाने मंजिल देखे मिलती भी है या नहीं||
जमी से फलक दूर तक परवाज है|
कशिश आज रंग देखे लाती हे या नहीं||
निराला ही अंदाज है नाजो-हुश्न का|
मुदत के बाद पर्दा देखे उठता है या नहीं ||
सखी उस मकाम पे जा पहुंचे है |
पलभर को चैन देखे मिलता है या नहीं||