वायुसेना:
भारत के लिए हम चल पड़े हैं
मिट्टी को स्वर्ग बनाने आ गये हैं,
आतंक का भय दिखाना छोड़ दो
हम ऊँची उड़ान भर, आग बरसाने आ गये हैं।
हम हिमालय से पूछने आ गये हैं
हम शहीदों को देखने पहुंच गये हैं,
मातृभूमि के रण बांकुरे हम हो गये हैं,
भारत का सिंहनाद सुनाने आ गये हैं।
शौर्य का वलिदान देखने आ गये हैं
रक्त का हिसाब लेने रूक गये हैं,
राह पर राह बनाने आ गये हैं
भारत का मस्तक उठाने आ गये हैं।
** महेश रौतेला