क्या खूब लोग है जमाने के तेरे ए खुदा ,जो भुला चुके हे आज जमीर अपना !होश में आओ ए दुनियावालों ,कही सच न होजाये ये बुरा सपना !उठ सुबहा करे साफ़ आँगन अपना ,पर जब मैल हो अपने अंदर तो उसे साफ़ करे कौन भला ?कर नेकी ...पर कभी उसका एहसान ना जाता ,वो सब देख रहा है...ये तुझे हे नहीं पता !बुरा सोचोगे तो बुराही पाओगें ,बदलकर अपनी सोच को तो देख......तुम इक नयी सुबहा लाओगे !दे इज़्ज़त ,ले इज़्ज़त,बढ़ादे अपने हर रिश्तेकी लज़्ज़त ,कौन कहता है की अच्छों के साथ बुरा होता है ,तुम अच्छे कर्म करके तो देखो ....फिर वो तुम्हे क्या क्या देता है !