उठ जा अपनी राख़ से, उठ जा खुद की तलाश में l
ना कर फिक्र कल की, निक जा खुद की तलाश में ll
गांव तेरा, घर तेरा वापस बुला रहा है पास अपने l
लौट कर घर चला जा, मूड जा खुद की तलाश में ll
मिट्टी से बना है मिट्टी मे मिल जाना है, सोचे क्यू l
खुदकी नजरसे देख जगको,मिट जा खुद की तलाश में ll