आखरी मुलाकात.......
पता नहीं पर क्यों आज उनकी नम आंखें हमसे मानो बहोत कुछ कहना चाहती हो..
मानो जैसे नदियों की तरह आज वो मुझ में बहकर कहना चाहती हो की...........
ओय..... सुन... @पगले आज आखरी बार वही पुराने रंग भरना चाहती हूँ.. कुछ पल तुझ संग जीना चाहती हूँ.
मुझे तेरा थोड़ासा साथ चाहिए.. हाथों में हाथ डाल तुझ संग थोड़े दूर तक चलना चाहती हूँ..
थकना चाहती हूँ.. दौड़ना चाहती हूँ.. बैठना चाहती हूँ.. बातें कर मुस्कराना चाहती हूँ..
वही पुरानी बैंच पे तेरे कंधे पर सर रख थोड़ा रोना चाहती हूँ.. सच कहूं तो आज सुकून पाना चाहती हूँ..
इस चंद लम्हों में सिर्फ प्रीत करना चाहती हूँ.. प्रीत कर तुझे मीत बनाना चाहती हूँ..
मीत बना तुझे संगीत बनाना चाहती हूँ.. बार बार वो संगीत सुन आखरी गीत बनाना चाहती हूँ..
कुछ मीठी यादे साथ ले जाना चाहती हूँ.. बस आज आखरी बार में जीना चाहती हूँ.. सिर्फ जीना चाहती हूँ..
@अभी