इल्तिजा....! - Poem by Devanshu Patel
ए खुदा, मुझसे जुदा, अपने मेरे क्यों दूर हैं?
क्या हुई मुझसे ख़ता? कैसा मेरा वो क़सूर है?
चाहता हूँ मैं जो, गर मुझे ना मिले कोई ग़म नहीं,
पर हो उसकी आँखे नम, वो देखूँ उतना दम नहीं।
ए खुदा, उसको सदा, जीवन के सुख भरपूर दे
चाहे फिर, मुझे ग़म से भर दे, वो मुझे मंजूर हैं
भर दे दामन में सितारों का उजाला आज तू,
छेड़ दे खुशियों के सारे, ए ख़ुदा, अब साज तू।
कम न हो जीवन में उसके प्यार का वो सुरूर दे,
इल्तिजा किस से करुँ, जब तू ही मेरा हुजूर हैं?
राहेँ फूलोंसे सजा, उसे ग़म के सायों से बचा,
ज़िंदगी का हर मज़ा दे प्यार की दे धूम मचा।
कर रहम उस पर, करम तेरे बड़े मशहूर हैं
आया मैं दर पे तेरे फिरआज क्यों मजबूर हैं?
ए खुदा, 'जाहिल' बड़ा मैं, क्या मेरी मक़्दूर हैं?
तुझसे हैं रोशन जहाँ, तुझ बिन ये सब बे-नूर हैं।
©️देवांशु पटेल
2 /20 /2019