बाद मुददत के उनसे मुलाकात हुई तो भी क्या ?
परदें में चांदनी से भरी रात हुई तो भी क्या ?
चूप के से बैठे थे यूं होठो को वो सीए हुए के ।
आंखो ही आंखो मे घंटो बात हुई तो भी क्या ?
जिंदगी लेती है इतने मोड क्यूं ये सोचता है दिल ।
जीवन की सोगठाबाजी में मात हुई तो भी क्या ?