आज मां भारती फिर बिलक बीलक कर रोई है।
४४ जवान सपूतों के चीथड़े गले लगाकर कैसे सो पाई है।
अपने पुत्रों के खून से भिंगे आचल को लेकर पुकार लगाई है।
मोदी तुम अब तो कुछ लाज करो।
या तो मेरा सिर्ताज कश्मीर का दान करो।
या दुश्मनों पर वार कर पाक का हवन करो।
मगर अब ओर मेरे लाल को मत कुर्बान करो।
अब ओर किसी मां के आचल को मत वीरान करो।
किसी बहिन कि राखी को मत बर्बाद करो।
अब ओर किसी के सिंदूर को मत वीरान करो।
अब ओर मेरे लाल के बच्चो को तुम मत अनाथ करो।
मैं तो मां हूं। मां।
मेरा तो धर्म है जयचंद को भी पालना।
मगर तुम फिर एक महाभारत का ऐलान करो।
अब जयचंद जैसे दुर्योधन का विनाश करो।
अर्जुन की गांडीव जैसा प्रहार करो।
दुश्मनों के घरों में घुसकर प्रतिशोध का आगाज़ करो।
बदले के साथ मेरे शहीद सपूतों की आत्मा को शांत करो।
आज फिर मां भारती बिलक बिलक कर रोई है
४४ जवान शहीद सपूतों के चीथड़े गले लगाकर कैसे सो पाई है।
ये लिखते हुए मेरी आंखे भी बेबसी से रोई है।
शहीद जवानों को कोटि कोटि नमन करता हूं।
जय जवान। जय हिन्द। जय मां भारती।
कवि एन आर ओमप्रकाश हमदम।