जो दुसरो को अपने से उपर न देख सके,
उसे ईश्वर कैसे उपर उठाए !
करकसर करना सीखना पडे |
ना उडाउ चाले न लोभी,
प्रमाण में रहना सीखना पडे |
तभी तो समानता बरकरार रहे |
कभी तकलीफ हुई आपकी उंचाई देख !?!
नहीं !
कहा सबके नसीब का मील ही जाता |
कभी बुरा चाहा आपके उडाउ पन देख !?!
नहीं !
लुटाते देख कहा करकसर सीख |
पर चढा था जुनून पैसे वाले है !
जो कुछ भी करे हमे कौन है रोकने वाला !
बस ! आया न रेहाना खुद को दोषी कहे हम को |
एकने काम कर इज्जत कमाई
दुजे ने तोफा दे इज्जत कमाई
काम करें उसका कोई न बोलें
क्योंकि वक्त बे वक्त बुलाने पर जाते नहीं |
काम हो तभी है जाते |
पर दिया हो भर भर उसका बोलते |
आए खाए चले गए |
आते रहते बेवक्त,
घर को अस्त व्यस्त कर चले जाते |
जो कोई भी स्थिति में जो अडग रहे,
वही रीश्ता नीभा सके |...ॐD