हां ! सही कहां ! अभिमानी का सब है जाता |
जो सोच को दायरे में रख सोचे उसका भी है जाता |
आपकी भावना कम न हुई पर काम जरुर बढा है |
कितनी भावना होगी की सीखने को भी तैयार हो गए |
बस यही तो करना है जो चाहिए वो देना पडता है |
मीलेगा यहां सब मीलेगा जाता भी नहीं |
बार बार देख सके, जो दिया उससे भी ज्यादा मीलेगा है |
पर एक ही करनते रहना जरुरी है नया सीखना और नया सीखाना |...ॐD