पहले देखना होता है काम कीतना है | फिर उस हिसाब से महेनत, दिन, समय, पैसा आदि कीतना लगने वाला है | फिर काम हाथमे लीया जाता है | जीनको पता होता है कि कोई भी काम आए हो जाएगा तो कोई तकलीफ नहीं रहेती |...ॐD
उस हिसाब से ये भी देखना होता है | व्यवहार करना है तो जान पहचान हो खुद की बात रखें उनकी बात सुने फिर अच्छा लगे तो बात आगे बढती है | अगर बीच में अटके तो संभालना भी आना चाहिए | वरना हर कोई समझोता कराता नहीं फिर सकता | मीलाने का काम होता है, निभाने का काम खुद करना पडता है |...ॐD