करती हुँ मैं बंदगी,सेवा ही मेरो काम
चुक हुई जो कोई, क्षमा कर देगे राम,
भक्ति में डूबी रहूं,निशदिन सुबह-शाम,
राम भरोसे ही चले, अपनो सारो काम,
चुन-चुन कलियाँ लाऊ ,धरु मैं तेरो ध्यान,
राम - राम रटी रहूँ, दूजो न कोई का काम,
जैसी जिसकी चाकरी, वैसी ही फल देत,
एक सहारो तेरो है, दूजो ना मिलियो नेक ,
चंदन तिलक लगाए के, पूजा करू मै रोज,
मंदिर - मंदिर जाकर भी,मिटी नहीं ये खोज,
Uma vaishnav
(मौलिक और स्वरचित)