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पडोसन के फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करते ही मन मयूरा नाच उठा..
फौरन इनबॉक्स में सलाम ठोक दिए..
तुरन्त जवाब भी आ गया..
रोज गुफ्तगू होने लगीं..
एक दूसरे का ख्याल रखा जाने लगा..
क्या बनाया.. क्या खाया..?
कौन सी ड्रेस में अच्छी लगती हूँ.. वगेरह.. वगेरह..
अक्सर ताड़ने के मौके ढूंढे जाने लगे..
एक दिन अचानक एक फंक्शन में मुलाकात हो गई..
हिम्मत जुटाकर उनके करीब जाकर कह ही दिया..
"भाभी जी.. फेसबुक पर तो आपका बड़ा रुतबा है..
एक-एक पोस्ट पर सेकड़ो लाइक्स.. कमेंट्स.. शेयर..
क्या कहने.. क्या कहने.."
वो बोलीं.. "अरे कहाँ भाई साहब..
मुझे तो घर के कामों से वक्त ही नही मिल पाता..
मेरी आई डी तो आपके भाईसाहब चलाते है.."
सन्नाटा.......?
*छन से जो टूटे कोई सपना..*
*जग सूना सूना लागे.. जग सूना सूना लागे रे...*
सत्य घटना पे आधारित .... हादसा ? ????
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