काम के अलावा जो इधर उधर की बातें होती है वो लोगों का दिमाग बीगाड रख देती है | तो बस मोज मस्ती मनोरंजन की या नया सीखा सीखाया ऐसी ही बातें होनी चाहिए | बुराईयां तो करो ही मत फिर खुद की बुराई भी कहीं दुसरे कर रहे होते है | बुराई करना बात न होती वो तो सबको पता होता है | क्या अच्छा लगा या क्या अच्छा कर सकते सोचना या बात करना सही रेहता है | बात करने के हजारों है पता नहीं क्यु लोगों को दुसरो की बुराई और खुद की तारीफ करना ज्यादा पसंद है | पर अब पसंद बदलने वाली है | जहां कहीं घूम आए हो वो बात की जा सकती है | कुछ अच्छा देखा वो बात कीसीसे कुछ अच्छा सुना पढा हो या खुद कुछ कीया हो वो बता सकते | देश दुनिया में हम अपनी तरफ से क्या योगदान दे सकते ये सोचना चाहिए | बुराई को देखना छोड अच्छाईयां देखो फिर देखो जीवन में कीतना आनंद आता है |...ॐD