॥एक यक्ष प्रश्न॥
मां! मेरी क्या पहचान है ?
मैं किसकी संतान हूं ?
जैसे ही तेरी कोख में ,
मेरा स्पंदन हुआ ,
सहा नहीं गया किसी को मेरा आना ,
माँ !....???
क्या मैं जायज या नाजायज थी?
क्या मैं तेरा लहू न थी ?
या मेरे लिए ….
तेरे दिल में जगह न थी ।
क्या मुझ में नहीं भगवान है ?
ना रंग कोई न रुप कोई ,
फिर भी ------
यह किसके मन का शैतान है?
मेरे आने की आहट से ,
मां ! मुझे क्यों दर-बदर कर दिया ?
कचरे में या गटर में फेंक दिया ।
तेरे खून के हजारों बिलबिलाते टुकड़े ,
चीख -चीख कर कह रहे थे ,
मां !तूने यह क्या किया ?
मेरे आने से पहले ही मुझको मार दिया ।
तू भी तो एक नारी थी ,
तुझे भी तेरी मां ने ,
यूं ही मिटा दिया होता ,
तो तू आज कहां होती है ????