वो दिन भी क्या अजीब थे ।
जब तुम मेरे करीब थे।।
ना सुबह का होश न शाम की खबर
लगने लगा था जैसे तुम ही मेरे नसीब थे।
तेरे ख्यालों में बीतती थी मेरी जिन्दगी
तुम ही मेरे खुदा थे तुम ही मेरे हबीब थे।।
वो दिन भी क्या अजीब थे।
जब तुम मेरे करीब थे।।
याद आते हैं अब भी गुजरे वो पल
होने लगती है दिल में फिर वही हलचल
तुमसे मिल कर समझ आया था हमें
कि इसके पहले हम कितने गरीब थे।।