*बुढ़ापा*
आइना दिखा देता है ये बुढ़ापा..
मायने समय की सीखा देता है बुढ़ापा।।
न कर तू गुमा यु अपनी दौलतों पे ए दिल
की हैसियत सभी की दिखा देता है बुढ़ापा।।
ज़मानों को चलाते थे जो उंगलियो पे अपनी।।
उनको भी कदमो पे गिरा देता है बुढ़ापा।।
न टिके थे न टिक पाएंगे जो आये थे बनके धुरंदर...
की हस्तियों को मिटटी में मिला देता हे बुढ़ापा।।
मुखोटों पे मुखोटा चाहे जितना तू पहन ले ।
की परदा सभी का उठा देता है बुढ़ापा।।
जवानियो को चाहे तू संभाल ले तिजोरी में।।
की डोलते सभी लूट जाता है बुढ़ापा।।
जा घूम आ तू बेथ कर जहाजो में जहानों को।।
शिफाखानो की मुलाकाते करवाता है बुढ़ापा।।
तू बन जा शहेंशाह,या तू बन जा सिकंदर
तू बन जा गरीब या तू बन जा तवंगर...
की भेदभाव,ऊंचनीच कहा देख पाता है बुढ़ापा।।
कर्मो की ही रीत को फिर से दोहराता हे बुढ़ापा।।
लेकिन....
खोलता सा खुन जो थामे झुर्रियो वाली उंगलिया।।
तो आफतो से भी उभर जाता है बुढ़ापा।।
झुक जाती है कमर,कहा जुक पाता है इरादा?
जो हौसला हो शेर सा तो जित जाता है बुढ़ापा।।
जो मायने तू सीखले वो काले सफ़ेद बालो की।।
तो जन्नते भी साथ लेकर आता है बुढ़ापा।।
तो जन्नते भी साथ लेकर आता है बुढ़ापा।।
◆ANV◆
शिफाखाना: hospital