बच्चो संग बच्चे बन अच्छी आदत सीखा सकते है—>...ॐD
कीतने ही बडे अरे बुढ्ढे भी हो तब भी मासुमियत, भोलापन, मुस्कान मतलब की अपने अंदर के बच्चे को न जाने दे जो मन करे नृत्य या संगीत का आदी जीनसे आनंद मीले वो करें फिर देखें परम शांति व आनंद मीलता है | अपने आपको अलग अलग किर्दारोका अनुभव कराओ बहोत आनंद आता है | जैसे बच्चों संग है तो हम भी बच्चे ही बने तो सीखा सकते है जैसे कि उसको सीखा सकते बीखरी चीज समेटना कुछ यु कि भले ही खुद ममा हो पापा या दादा- दादी पहले खेले फिर कहे अरे ! ये तो कीतना गंदा हो गया क्युकि हमें समज है इसलिए बच्चो के संग पहले खेले बाद में जब समेटे नहीं तब कहां जा सकता अरे ! देखो ये चुभ गया उसे अच्छे से रख देते है | फिर केह सकते अरे ! इसका घर कहां है केह कर खीलौने रखवा सके | इस तरह घर साफ हो जाता है और अच्छी आदत भी हो जाती है |...ॐD