इश्क
शमा पे परवाना एक बार मरता है ।
दीवाना इश्क में बार बार मरता है ॥
बिखराओ ना अपनी झुल्फों को तुम ।
दीवाना इन में डुब के मरता है ॥
निगाहों में सजाया हे जो सुरमा ।
दीवाना मस्तीभरी अदा पे मरता है ॥
अंदाज बदलता रहेता हे हुश्न ।
दीवाना इश्क में रोज मरता है ॥
सखी हुश्न ओर इश्क के फसाने ।
दीवाना जूस्त्जू में युही मरता है ॥