मंजर
उदास रातका मंजर बदल भी सकता है ।
नए लिबास में सूरज निकल भी सकता है ।।
बर्क गीरी हे नगर मे बेसुमार ।
तूटा ये मंजर संभल भी सकता है ।।
छलकते हे जाम मस्तीभरी आंखोसे ।
ऐसे में दिल मचल भी सकता है ।।
पैमाने भरे हे मय से मयखाने खाली ।
तश्नालब मस्ती से उछल भी सकता है ।।
सुरुर इस तरह छाया हे इश्क का।
पथ्थर दिल पिघल भी सकता है ।।