#shabdotsav
बेगानो की क्या बात करो.... लोग यहां अपनो को भुला देते है
वक़्त के साथ साथ ये हर हसीन लम्हा जला देते है....
हसने रोने की यादों को मिटा देते है....
साथ चलते थे उस राह को भुला देते है....
कोन यहां अपना कोन बेगाना, ये वक़्त खुब मालूम करदेता है...
रिश्तों की एहमियत को ये बडी ले से सजा देता है....
यहां लोग उसीको रुलाते है... जिसने कभी हसाया था...
उसके दामन मे गम छोड़ जाते है, जिसने कभी प्यार से सुलाया था....
कोई यहां अपना था जो आज बेगाना बन चला है....
कोई यहां अपना था जो आज सपना बन चला है....
कोई यहां अपना था जो आंखों मैं आंसू दे चला है....
ये हर आंसुओ को पिलेते है....
वही है ये आशिक़ जो गम मैं भी जिलेते है....
प्यार की हर आस को मिटादेते है लोग...
यहां तो अक्सर रात के बाद सुबह दीये को भी भुजा देते है लोग...