जब अचानक भगवान बादलों में चले जाते हैं
तो बादलों का रंग सुनहरा हो जाता है,
हम उन्हें ऊपर वाला ही कहते हैं,
कभी वाणी में आते हैं
तो वाणी मधुर हो जाती है।
कभी प्यार में सुनायी पड़ते हैं
तो प्यार जगमगाने लगता है,
कभी पहाड़ों पर चले जाते हैं
तो पहाड़ तीर्थ बन जाते हैं।
कभी महासागरों की लहरों पर जाते हैं
तो अद्भुत वेग ले आते हैं,
कभी खेत में होते हैं
तो अन्न लहलहाने लगता है।
कभी युद्ध में चले जाते हैं
तो अजनबी हो जाते हैं,
अचानक भगवान का आना
और अचानक इधर-उधर चले जाना,
हमारी जीजिविषा के लिए ही होता है।
****** महेश रौतेला