Hindi Quote in Story by Anju Kharbanda

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कही अनकही - अंजू खरबंदा

"लगता है फिर रात भर नहीं सोई।"
सुबह उठते ही सुकेश ने शैली की ओर देखते हुए कहा।

शैली ने भरसक मुसकुराने कोशिश की पर आंखो की नमी छुपा न पाई।
"हां.. बस नींद ही नहीं आई!"

"देखा तुम्हें करवटें बदलते! पर जब तक तुम बताओगी नहीं तो कैसे जानूंगा मैं । क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं!"
शैली मूकदर्शक सी बैठी रही।

"मैं तुम्हारा पति हूँ पर उससे पहले एक दोस्त!" सुकेश ने शैली का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा।

"हां जानती हूँ सुकेश! पर जाने क्यूं हिम्मत नहीं कर पा रही तुम्हें कहने की!"

"ऐसा क्या है शैली! जो हम दोनों के रिश्ते से भी बढ़कर हो गया!" आहत सा हो गया सुकेश।

"सुकेश! जब हमारी शादी हुई थी तो हमने डिसाइड किया था कि फाइनेंशियली सेटल होने के बाद ही हम फैमिली के बारे में सोचेगे ।" ऐसा लगा शैली कुछ कहने से पहले भूमिका बांध रही हो।

"हां ये डिसीजन हम दोनों का था और इसमें गलत भी क्या है!" सुकेश शैली के चेहरे की ओर देखते हुए बोला।

"सुकेश!!! एक्चुअली आई एम प्रेगनेंट!!!" शैली एक ही सांस में कह गई।

"प्रेगनेंट !!!!" बेसाख़्ता सुकेश के मुंह से निकला।
"हां! और मैं ये बच्चा चाहती हूँ पर तुम्हें कहने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी कि कहीं तुम इसे...!"

"पागल हो शैली!!! तुमने कैसे सोच लिया कि मैं इतनी बड़ी बेवकूफी करूँगा ! पिछले दो साल में हमने खुद को इतना तो सैटल कर ही लिया है कि हम इस बारे मे सोच सकते हैं और न भी किया होता तब भी शैली! तब भी मैं तुम्हारे हर निर्णय में तुम्हारे साथ ही होता । " सुकेश ने अपने दोनों हाथों में शैली के चेहरे को भरते हुए कहा ।
"सुकेश !" शैली बस इतना ही कह पाई ।

"स्त्री और पुरुष में यही बुनियादी फर्क होता है कि स्त्री कह देती है और पुरुष हर बात कह नहीं पाते । पर है तो दोनों एक दूसरे के पूरक । " सुकेश का कहा एक एक शब्द शैली के दिल में उतरता चला गया।
अश्रु भरे नयनों से उसने सुकेश की ओर देखा जहाँ प्रेम का अथाह सागर दिखलाई पङा।

"आज मैं बहुत खुश हूँ शैली! यूँ लग रहा है जैसे जीवन में एक नई उमंग भर गई हो ! " सुकेश की खुशी से भर्राई आवाज़ शैली के कानों में पङी - और हां ! आज ही अपना रिजाइन लैटर दे आना । आज से तुम्हारा काम है अपना और हमारे बच्चे का अच्छे से ध्यान रखना । समझीं! " कहकर उसने शैली को गले से लगा लिया।

शैली को यूँ महसूस हुआ जैसे सुकेश दो कदम और दिल के करीब हो गया हो । उसने अपना सिर सुकेश के सीने पर टिका लिया।

"अरे !!! आज आफिस की बस निकलवाओगी क्या! बाकी शाम को...! " खिलखिलाते हुए सुकेश बाथरूम की ओर भागा । शैली भी उसकी इस अदा पर निसार हो खिलखिला कर हँस पड़ी मानो मनों बोझ उसके सीने से उतर गया हो ।

Hindi Story by Anju Kharbanda : 111051543
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