अपनी-अपनी सोच - अंजू खरबंदा
"गुडो आज इती देर कर दी तूने आने में । आज आफिस मे फिर से बातें सुननी पङेगी ।" रिदिमा बङबङाती जा रही थी ।
"दीदी.....!" गुडो ने कुछ कहना चाहा पर रिदिमा ने उसकी बात को अनसुना करते हुए कहा-
"ले संभाल इसे । रात भर ठीक से सोने भी नही दिया इसने । शायद बुखार होगा । ये ले ये रूपये रख ले, इसे डाक्टर को दिखला आइयो । "
रिदिमा ने जल्दबाजी में पर्स उठाकर निकलने को हुई तो गुडो ने हिम्मत कर उसका रास्ता रोकते हुए कहा-
"मै आज काम पर नही आऊंगी ! बस यही कहने आई थी । मेरी बच्ची को बुखार है, काम बच्चे से बढ़कर तो नहीं ।"