देशों में मेरा देश भारत,
वेदों में मेरा वेद भारत
शास्त्रों में मेरा शास्त्र भारत
अक्षरों में मेरा अक्षर भारत।
नदियों को जिसने पवित्र कहा
वृक्ष जहाँ पूजे जाते,
देवों में भी जीव जहाँ हैं
ज्ञान का सागर भारत।
कुछ रूक - रूक कर, कुछ ठहर- ठहर कर,
चलता जाता मेरा भारत,
कुछ मेरे मन का, कुछ तेरे मन का,
बनता जाता हमारा भारत।
जब रूठ गयीं सदियां सारी
रूखा -सूखा सा दिखता भारत,
कभी सोने की चिड़िया बन
उड़ा हुआ है मेरा भारत।
*महेश रौतेला