लिखती हूँ कविता..।
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जब दिल कुछ कहता है
तब लिखती हूँ कविता।
जब याद मुझे सताती है
तब लिखती हूँ कविता।
जब दर्द नजर आता है
तब लिखती हूँ कविता
जब कोई सताता है
तब लिखती हूँ कविता।
सड़कों पर देख बचपन
तब लिखती हूँ कविता
जब टीस उभरती है
तब लिखती हूँ कविता।
जब रोती है इंसानियत
तब लिखती हूँ कविता
जब देखूँ भूख लाचारी
तब लिखती हूँ कविता।
जब लुटती है यहां नारी
तब लिखती हूँ कविता
जब दिखता अत्याचारी
तब लिखती हूँ कविता।
जब बेटी फिरे मारी मारी
तब लिखती हूँ कविता
जब रोती आँख हमारी
तब लिखती हूँ कविता।
जब देखती बेरोजगारी
तब लिखती हूँ कविता
जब नष्ट होती खेती सारी
तब लिखती हूँ कविता।
जब बढ़ती लालच की बिमारी
तब लिखती हूँ कविता
जब मानवता है हारी
तब लिखती हूँ कविता।
दिव्या राकेश शर्मा✍️✍️