कविता संग्रह *"वो नीम का पेड़ "*से
कविता
*मन ढूंढे साजन को*
पूनम के चांद सुनो! उज्जवल
क्या तुमने साजन को देखा है?
तुम घूम रहे उजयालों में
मेरे मन में विकट अंधेरा है।
कोई चिठिया नहीं , संदेश नहीं !
इक तीर ज़िगर पर फैंका है।
ऐ चकोर बता तू तो ख़ुश है?
तेरे लिए तो आज सवेरा है।
बूंदों से बने मोती कह दो !
क्या उनका संदेशा लाए हो?
मैं तड़प रही हूं अकेली यहां ,या
उन्हें भी यादों में भिगोकर आए हो?
ऐ शीत लहर साथ ले चल ,देखूं!
क्या उनके हांथ में मेरी रेखा है?
मैं पत्ता बन उड़ चलती हूं,
वो मेरा है ,बस मेरा है।।
सीमा शिवहरे" सुमन"