मेरे अंदर रहते दोनों
साहिर और अम्रिता
शाम ढले मैं साथ में उनके
बैठ के जाम हूँ पीता
दोनों मेरे अंदर रहते
साथ साथ कुछ ऐसे
जैसे मेरी मेज़ पे रहते
कुरान भगवद् गीता
साहिर बातें करता जाए
शांत सूने अम्रिता
फिर वो अपनी डायरी लेकर
लिखती, जो है बीता
जाम अम्रिता का जूठा ले
साहिर घूंट लगाए
साहिर की सिगरेट की खुश्बू
पीती है अम्रिता
मेरे अंदर दोनों है जो
साथ नही जी पाये
शायद मेरे अंदर आज भी
एक इमरोझ है जीता
-तुषार शुक्ल